Ramzan kya hai | Roze kyon rakhte hain

बहुत से लोग जो मुस्लिम नहीं है वो रमज़ान को मुस्लिमों का त्यौहार समझते हैं जबकि ये जानकारी उनकी बिलकुल गलत है दरअसल रमज़ान Ramzan इस्लामिक कैलंडर का 9 वां महिना है दुनियाँ भर के मुसलमानों के लिए रमज़ान का महिना बहुत पवित्र होता है इस पुरे महीने वो रोज़े रखते हैं और इबादत करते हैं आज इस आर्टिकल में ज़रिये हम जानेंगे रमज़ान की शुरुवात कैसे हुई, क्या है रमज़ान का इतिहास, रोज़े क्यों रखते हैं मुसलमान

रमज़ान क्या है ?

जैसा की रोमन कैलंडर होता है, हिन्दू धर का कैलंडर होता है वैसा ही इस्लामिक कैलंडर भी होता है इस कैलंडर के 9 वें महीने को रमज़ान Ramzan का महिना कहा जाता है इस महीने का बहुत महत्व है इस्लाम धर्म में दुनियाँ भर के मुसलमान इस महीने में रोज़े (उपवास) रखते हैं इबादत करते हैं मुसलमानों का ऐसा मानना है की इसी महीने में उनकी पवित्र किताब क़ुरान शरीफ को खुदा ने दुनियाँ में भेजा था इस लिए ये महिन बहुत खास माना जाता है

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क़ुरान शरीफ दुनियाँ में कब आई थी ?

ऐसा माना जाता है की दुनियाँ में क़ुरान शरीफ रमज़ान Ramzan के पवित्र महीने में 27 वीं तारीख की रात को आई थी इस लिए इस महीने में कुरान शरीफ की तिलावत (कुरान शरीफ को पढ़ना) जितना ज्यादा हो उतनी की जाती है खास तौर पर तरावीह का आयोजन किया जाता है जिसमें क़ुरान शरीफ को पढ़ा जाता है ताकि जिसे पढ़ना ना भी आता हो वो कम से कम सून सके

रोज़ा क्या है

जैसा की हमको मालूम है की रमज़ान Ramzan का महिना मुस्लामानो के लिए कितना महत्वपूर्ण है इस महीने में दुनियाँ भर के मुसलमान रोज़े रखते हैं कई दोस्तों के मन में ये ख्याल आता होगा की रोज़े का क्या मतलब होता है रोज़ा को अरबी में सौम कहा जाता है जिसका शाब्दिक अर्थ होता ठरना या रुकना और फारसी में रोज़ा का मतलब होता है उपवास अपने सभी तरह की ख्वाहीशों पर नियंरण करना सबसे अच्छा व्यवहार करना एक नेक इंसान बनना और उपवास रखना ताकि अपनी सभी इन्द्रियों पर नियंत्रण किया जा सके

क्या है रोज़े का इतिहास

ऐसा इतिहास में आता है की रोज़े की शुरुवात मुहम्मद साहब ने की थी जो इस्लाम धर्म के संस्थापक भी हैं हुआ कुछ ऐसा था की मुहम्मद साहब जब मक्के से हिजरत ( निकलकर) मदीने आये थे उसके एक साल बाद उन्होंने रोज़े रखे और उस्सी समय से इसकी शुरुवात हुई थी

कुरआन की दूसरी आयत सूरह अल बकरा में लिखा है कि ‘रोजा तुमपर उसी तरह से फर्ज किया जाता है, जैसे तुमसे पहले की उम्मत पर फर्ज था.’

किसे छुट दी गई है रोज़े रखने से ऐसे तो इस्लाम में रोज़े रखने का हुक्म सबके लिए है जो बालिग़ हो मगर फिर भी कुछ विशेष परिस्तिथि में रोज़े रखने से छुट दी गई है जैसे

  • वो जो किसी सफ़र पर हो
  • बीमार व्यक्ति
  • गर्भवती महिलाएं
  • ऐसी महिलाएं जिनके पीरियड्स चल रहे हो

रोज़ा कैसे रखा जाता है

रोज़े रखें के कुछ सख्त नियम होते हैं जैसे सुबह की नमाज़ के पहले खाया जाता है जिसे सहरी कहते हैं फिर नमाज़ पढ़ी जाती है और फिर कुरान शरीफ की तिलावत की जाती है दिन भर अपने शरीर को पाक और साफ़ रखा जाता है और कोशिश की जाती है की किसी किस्म की कोई ऐसी घटना न घटे जिससे किसी को भी परेशानी हो गरीबों की मदद करना भी इसमें शामिल है फिर शाम ढलने पर नमाज़ के पहले खाया जाता है जिसे इफ्तार कहा जाता है इस तरह का एक दिन गुज़रता है रोज़े का

सहरी क्या होती है

सहर का मतलब होता है सुबह इसी शब्द सहर से बना है सहरी रमज़ान Ramzan के महीने में जब रोज़े रखे जाते हैं तो उसकि शुरुवात हर दिन सहरी से की जाती है फ़ज्र की नमाज़ के पहले कुछ खा कर रोज़े की नियत के साथ रोज़े की शुरुवात की जाती है जिसे सहरी कहा जाता है

इफ़्तार क्या होता है

सहरी से रमज़ान Ramzan के महीने रोज़े की शुरुवात होती है उसके बाद पूरे दिन भर कुछ भी नहीं खाया जाता ना ही पीया जाता है बहुत सख्ती के साथ पूरा दिन गुज़रता है उसके बाद सूरज ढलने के बाद मगरिब की आजान होने पर रोजा खोला जाता है जिसके बाद कुछ खाने पिने की बंदिश नहीं होती इसे इफ़्तार कहा जाता है

तरावीह क्या होती है

एक किस्म की नमाज़ का नाम है तरावीह ये अरबी से लिया गया एक शब्द है जिसका मतलब होता है ठहरना या आराम करना इस्लाम में हर मुस्लिम व्यक्ति को दिन की 5 नमाज़े पढना ज़रूरी है मगर रमज़ान का महिना ही इबादतों का महीना है इसलिए इस महीने में इन 5 नमाज़ों के अलावा लोग कुरआन शरीफ की तिलावत भी करते हैं

तरावीह की नमाज़ रमज़ान के पहले दिन से शुरू की जाती है और रमाजन Ramzan के आखरी दिन तक पढ़ी जाती है इस नमाज में कुरआन शरीफ की हर दिन कुछ आयतें पढ़ी और पढाई जाती हैं और जब तक कुरआन शरीफ के पुरे 30 पारे खत्म नहीं हो जाते तब तक ये सिलसिला जारी रहता है

रमज़ान में बरसती हैं अल्लाह की नेमतें

मुसलमानों में ऐसी मान्यता है की रमज़ान Ramzan के महीने में अल्लाह जन्नत के दरवाज़े खोल देता हैं वो अपने रोज़ेदार बन्दों की हर जायज़ मांग को पूरा करता है वोकेहता है जो मुझसे दुआ करेगा मैं उसकि मांग पूरी करूँगा, अल्लाह इस महीने में शैतान को क़ैद कर देता है रमजान के महीने में ही अल्लाह ने कुरआन नाजिल की, जिसमें जीवन जीने के तरीके बताए गए हैं. यह महीना सुकून और सब्र का महीना है. रमजान में अल्लाह की खास रहमतें बरसती हैं. अगर इस्लाम समुदाय का व्यक्ति रमजान के नियमों का पालन करता है तो अल्लाह उसके पिछले सभी गुनाह माफ कर देते हैं. साथ ही, इस महीने में की गई इबादत और अच्छे काम का 70 गुना पुण्य अल्लाह देते हैं.

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