क्या आपने कभी सोचा है क्यों फहराते हैं लाल किले पर तिरंगा ?

दिल्ली हमेशा से सत्ता का केंद्र है पहले मुग़ल फिर अंग्रेज़, 1947 के बाद भारत का झंडा वहां फहराया जाता है 

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साल 2007 में विश्व धरोहर में भी शामिल किया गया  इसके निर्माण में 10 सालों का समय लगा था ये 1648 ईस्वी में बनकर तैयार हुआ था इसका निर्माण शाहजहाँ ने करवाया था 

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भारत देश के झंडे को तिरंगा कहा जाता है क्यों की इसमें तीन रंग होते हैं सफ़ेद, केसरिया और हरा इस झंडे के बीच में अशोक चक्र बना होता है 

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 तिरंगे को उसका ये रूप पिंगली वैन्कैयानंद ने दिया था इस तिरंगे को 22 जुलाई 1947 के दिन आयोजित संविधान सभा के दौरान अपनाया गया था

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तिरंगे को स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के दिन प्रधानमंत्री के हाथों लाल किले पर फ़हराया जाता है ये सीलसीला देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने शुरू किया था 

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तिरंगे में सफ़ेद पट्टी के बीच में नील रंग का चक्र है जो धर्म चक्र है ये सम्राट अशोक द्वारा बनाये मीनार से लिया गया जो सारनाथ में स्थित है इसमें 24 तीलियाँ बनी है 

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तिरंगे झंडे के कानून में संसोधन किया गया साल 2002 में अब कोई भी देश का नागरिक कहीं भी किसी जगह भी शैक्षणिक संस्थानों, कारखानों, कार्यालयों या फिर अपने घरों में ध्वजारोहण कर सकता है

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये अपील किहे देश वासियों से की वो 13 से 15 अगस्त तक अपने अपने घरों में तिरंगा झंडा लगाये हर घर तिरंगा अभियान के अंतर्गत देश भर में 25 करोड़ घरों में झंडा फ़हराया जायेगा

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