why we celebrate new year day on january 1st

1 जनवरी को ही नया साल क्यों मानाते हैं ?

साल का आखरी महिना दिसम्बर अब ख़त्म होने को है, सब के दिल में एक अलग सी तरंगे आना शुरू हो चुकी होंगी की, आने वाले नए साल को किस तरह यादगार बनाया जा सकता है। और किस तरह इस जश्न को मनाया जाए ? अलग-अलग लोगों की अलग-अलग तैयारियां चल रही होंगी मगर क्या कभी आपने ये सोचा है की, आखिर नया साल 1 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है? आखिर इस नए साल को कब से मनाया जा रहा है ? यानि की इसका इतिहास क्या है ?आइये इससे पहले ये जान लेते हैं की, हमारे देश भारत में नया साल कब कब मनाया जाता है।

भारत में कब- कब मनाया जाता है नया साल

जैसा की हम जानते हैं की, भारत एक गुलदस्ते के जैसा देश है जहां बहुत से अलग अलग धर्म और जाति के लोग एक साथ रहते हैं और एक दुसरे से ऐसे मिले जुले हैं की फर्क करना मुश्किल हो जाता है की कौन किस धर्म या कौन किस जाति से है। यही हमारे देश की खूबसूरती का राज़ है जहां तक बात है नए साल के मनाने की तो सभी अपने अपने धर्मों के हिसाब से नए साल को मानते हैं। आइये जान लेते हैं की, कौन से धर्म का नया साल कब मनाया जाता है ? और उसके पीछे क्या कारण हैं ?

हिन्दू नव वर्ष

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भारत में हिन्दू नव वर्ष प्रत्येक वर्ष चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से मनाया जाता है, ऐसी एक प्रचलित मान्यता है की, भगवान ब्रम्हा ने इस दिन हमारी इस सृष्टि की रचना करना प्रारम्भ किया था। इस दिन को हिन्दू नव संवत्सर या नया संवत भी कहते हैं। इसी दिन से विक्रम संवत के नए साल की शुरुवात भी होती है, English Calendar के हिसाब से हिन्दू नव वर्ष अप्रेल के महीने में आता है।इस नए साल को भारत  के विभिन्न प्रान्तों में गुड़ी पड़वा, उगादी आदि नामों से भी मनाया जाता है।

मुस्लिम नव वर्ष

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भारत में मुस्लिम धर्म के मानने वाले बहुत बड़ी संख्या में रहते हैं, जहां तक बात है मुस्लिम नववर्ष की तो इसे अरबी और हिजरी नव वर्ष के नाम से भी जाना जाता है। इस्लाम धर्म में अल- हिजरा Islamic Calendar को प्राथमिकता दी जाती है। इस्लामिक Calendar के हिसाब से नया साल सारी दुनियाँ के मुसलमान मूहोर्रम के महीने से मानते हैं, यानि ये इस्लामिक Calendar का नया साल होता है। मुस्लिमों की आस्था है की, मूहोर्रम के महीने को हज़रत मूहोम्मद सल्लाहो अलैहि वसल्लम ने ख़ुदा का महिना बताया है।

सिख नव वर्ष

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भारत में सिख धर्म के मानने वाले लोग भी बहुत अच्छी ख़ासी संख्या में हैं, भारत में सबसे ज़्यादा खेती किसानी के कामों से जुड़े हुए सिख समुदाय के लोग हैं। जो की काफी मेहनतकश माने जाते हैं ना सिर्फ ये खेतों में काम करने में कुशल होते हैं बल्कि ये सेना में भी बड़ी तादाद में होते हैं। सिख अपना नया साल बैसाखी पर्व के तौर पर मानते हैं, जो की English Calendar मे April के महीने में आता है। सिख नानकशाही Calendar के हिसाब से होला मूहोल्ला यानि होली के दूसरे दिन से सिख नया साल शुरु होता है।

जैन नव वर्ष

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जैन धर्म को मनाने वाले लोग अपना नया साल दिवाली के अगले दिन से मानते हैं। उनका मानना है की, भगवान महावीर स्वामी को दिवाली के दिन ही मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। इस वजह से जैन धर्म के मनाने वाले अपने नए साल की शुरुवात दिवाली के दूसरे दिन से करते हैं, इस दिन को वो वीर निर्वाण संवत भी कहते हैं।

पारसी नव वर्ष

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पारसी धर्म के मनाने वाले लोग अपने नए साल को नवरोज़ कहते हैं। अकसर ये नवरोज़ का उत्सव वो लोग 19 अगस्त के दिन मानते हैं, ऐसा कहा जाता है की 3000 ई.सा. पूर्व शाह जमशेद जी ने नवरोज़ मनाने की शुरुवात की थी।

रोमन नया साल Roman New Year

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जहां तक बात है Roman  Calendar की तो दुनियाँ में ये ही चलन मे है, जिसमें 1 जनवरी से साल शुरू हो कर 31 दिसम्बर तक का एक साल माना जाता है। अब सवाल ये आता है की इस Calendar का क्या इतिहास है ? और ये किसने शुरू किया था तो बात है आज से लगभग 2000 साल पहले की रोमन Calendar में January साल का पहला महिना जब माना गया था। इस Calendar को रोमन सम्राट जूलियस सीज़र ने शुरू किया था ऐसा एक पक्ष है दूसरा पक्ष ये कहता है की, इस Calendar की शुरुवात  ग्रेगोरिया तेरहवें पोप ने की थी।

            रोमन साम्राज्य के लोग अपने भगवान जिनका नाम जेनस था। उन्ही के नाम पर अपने Calendar के पहले महीने का नाम रखा January रोमन साम्राज्य के लोगों की आस्था के अनुसार भगवान जेनस के दो चेहरे थे, जो शुरुवात और अंत का प्रतीक हैं ऐसा माना जाता था की, भगवान एक ही समय में दोनों तरफ देख सकते हैं। इस यानि वो एक साथ दोनों समय को देख सकते हैं वो ऐसा मानते थे की, January में किसी भी नई योजना की शुरुवात की जा सकती है जो की सही समय रहेगा।

उनके लिए एक तार्किक बात भी है January में नया साल मनाने की वो ये की, यही समय होता है जब यूरोप में दिनों की लंबाई यानि दिनों के घंटे बढ्ने लगते है। लंबी सर्दियों के बाद। जैसे -जैसे रोमनों ने अपने साम्राज्य को बढ़ाना शुरू कर दिया, वो साथ साथ अपने इस Calendar को भी बढ़ाने लगे और ये धीरे धीरे हर जगह प्रचलित और मान्य हो गया। 

 

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