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1 may ko Intarnational labour day kyon manaya jata hai

दुनिया भर में 1 मई के दिन को मज़दूर दिवस International Labour Day  के तौर पर मनाया जाता है। आज दुनिया ने बहुत तरक्की कर ली है, पहले हम एक जगह से दूसरे जगह जाने की नहीं सोच सकते थे, मगर आज आलम ये है की हम मंगल गृह तक चले गए अब आपको लगेगा की कहाँ मंगल गृह की बात कर दी गई मज़दूर दिवस के अवसर पर.

मगर क्या आप जानते हैं की, बिना मज़दूरों के कोई भी काम नहीं किया जा सकता, किसी भी निर्माण की पहली कड़ी मजदुर होते हैं इस लिए जब भी किसी उपलब्धि की बात होती है मज़दूरों की बात ज़रूरी है की की जाये।

मज़दूर दिवस को  Labour Day , मई दिवस, श्रमिक दिवस, कामगार दिवस जैसे नामों से भी जाना जाता है, इस दिन मज़दूरों की एकता उनके अधिकार उनकी सुविधाओं उनकी ज़िन्दगी उनके हक़ों के लिए समर्थन देने की उद्देश्य से मज़दूर दिवस International Labour Day मनाया जाता है।

इस दिन जुलुस निकली जाती है कारखानों में विशेष कार्यक्रम का आयोजन होता है कई जहाँ संभव हो वहां इस दिन छुट्टी भी घोषित की जाती है।

मज़दूर दिवस का इतिहास

पूंजीपतियों ने हमेशा मज़दूरों का दमन किया है आप किसी भी समय की बात देख लें। ऐसे ही एक बार की बात है, जब अमेरिका में मज़दूरों ने काम बंद कर दिया और अपने हक़ के लिए सड़कों पर उतर आये सन 1886 में MAY DAY के मौके पर ये वो मज़दूर थे जो खदानों मीलों में काम किया करते थे।  ये दिन के 15 – 15 घंटे काम किया करते थे न ये अपने बच्चों को समय दे पाते थे ना ही इनकी कोई पारिवारिक ज़िन्दगी बची थी और न ही इनकों इनके काम के हिसाब से वेतन दिया जाता था।

जिससे तंग आकर आखिर कार 2 लाख से ज़्यादा मज़दूर एक ही दिन सड़कों पर उतर आये उनकी मांग थी की उनका वेतन बढ़ाया जाये और उनक जाम करने के समय में कटौती की जाए अपने आंदोलन को उन्होंने ने अपनी इसी मांग के आधार पर खड़ा किया।

इसके बाद सन 1889 में पेरिस में हुए एक अंतराष्ट्रीय सम्मेलन में एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें इस बात की घोषणा की गई की आज से मज़दूरों के काम करने का समय 8 घंटे का होगा और 1 मई के दिन मज़दूर दिवस International Labour Day  के तौर पर मनाया जायेगा सारी दुनिया में।

क्या आप जानते हैं विश्व जल दिवस कब मनाया जाता है 

भारत में कब से मनाया जा रहा है मज़दूर दिवस

मज़दूर दिवस की शुरुवात भारत में सबसे चेन्नई से 1 मई 1923 को हुई इसकी शुरुवात लेबर किसान पार्टी ऑफ़ हिन्दुस्तान ने की थी इसी दिन लाल रंग के झंडे का इस्तेमाल मज़दूरों की झंडे के तौर पर किया गया था ये भारत में मज़दूर आंदोलन और उससे जुड़े मुद्दे की शुरुवात थी इस आंदोलन को वामपंथी और सोशललिश्ट का समर्थन हासिल था।

 

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