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international transgender day of visibility kab manaya jata hai

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हर साल 31 मार्च के दिन विश्व परलैंगिक दिवस international transgender day of visibility मनाया जाता है, समाज में उनको बराबरी का हक़ दिलाने और उनके द्वारा किये गए उत्कृष्ट कार्यों को समाज के सामने लाने के लिए इस दिन को मनाया जाता है।

कब से मनाया जा रहा है विश्व परलैंगिक दिवस international transgender day of visibility

आपने भी देखा होगा कैसे समाज पेश आता है उन लोगों के साथ जिनका लिंग निर्धारित नहीं होता, यानी वो जो न ही पुरुष होते हैं ना ही महिला। उनको नाचने गाने वालों के अलावा कुछ नहीं समझा जाता, यहाँ तक की कई बार उनसे इंसानो के जैसा व्यवहार भी नहीं किया जाता है और ये समस्या ना सिर्फ हमारे देश में है, बल्कि ये कुरीति सारी दुनिया में इन लोगों को झेलनी पड़ी है।

ऐसे ही अमेरिका के एक ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता जो की इन लोगों के लिए काम करते थे, इनके हक़ की आवाज़ बुलंद करते थे रशेल क्रैंडल Rachel Crandall  नाम था। उनका साल 2009, 31 मार्च के दिन में मिशिगन से इस दिन की शुरुवात की थी। क्रैंडल इस बात से दुखी थे की ऐसे लोगों को अहमियत नहीं दी जाती और सिर्फ उनको याद किया जाता है, जब उनकी हत्या हो जाती है। जो जीवित Transgender  है उनको सामाज द्वारा उपेक्षित रखा जाता है इसलिए इस दिन की शुरुवात क्रैंडल ने की थी।

क्या होते हैं Transgender

हमारे समाज में जो पूर्ण रूप से महिला या पुरुष ना हो उसको आमतौर पर मज़ाक और अपमान का सामना करना पड़ता है, जबकि ये भी बाकी लोगों की तरह आम इंसान होते हैं। Transgender शब्द अपने आप में एक व्यापक शब्द है। इसकी कई परिभाषाएं हैं एक महिला जो महिला के रूप में है मगर वो महिला नहीं होती। वैसे ही एक पुरुष जो पुरुष के रूप में होता है मगर पुरुष नहीं होता, इनदोनो स्तिथि को ट्रांसजेंडर कहते हैं। 

जो ना ही पुरुष हो पूरी तरीके से ना ही महिला हो पूरी तरीके से उसको ट्रांसजेंडर कहा जाता है, ये महिला या पुरुष दोनों के तरफ आकर्षित हो सकते है।

Transgender कोई बीमारी नहीं है, ये एक किस्म की सोच है जो किसी किसी पर हावी हो जाती है। पैदा वो किसी और लिंग में होता है मगर उसकी चाहत उसकी हरकतें उसका बात करने चलने का अंदाज़ बिलकुल दूसरे लिंग के जैसा होता है। जैसे मान लीजिये कोई बच्चा पैदा हुआ अपनी पैदाइश के वक़्त वो लड़का था, मगर जैसे जैसे वो बड़ा हुआ उसने दुनिया को देखा समझा उसके अंदर से उसने ऐसा महसूस किया जैसे वो लड़की है। अब और सारी हरकतें लड़कियों की करने लगा ये बात लड़कियों पर भी लागु होती है।

कुछ लोग अपने लिंग के विपरीत कपड़ों का चुनाव करते हैं, उन्हें Cross – Dresser कहा जाता है। कुछ ट्रांसजेंडर अपने हिसाब से अपना लिंग परिवर्तन करवाते हैं उन्हें Transsexual कहा जाता है।

अगर एक Transgender व्यक्ति किसी महिला या पुरुष से प्यार करे तो उसे ट्रांसजेंडर कहा जाता है। और अगर एक इसके विपरीत प्यार की चाहत रखता हो तो उसे Lesbian transgender या Gay transgender कहा जाता है या Bysexual कहा जाता है।

 

आपके लिए ये जानना भी ज़रूरी है 

 

LGBTIQ क्या होता है 

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हालाँकि भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने अब तीसरे लिंग को मान्यता दे दी है, ये बात भी बहुत पुरानी हो गई है। मगर फिर भी समाज में भ्र्म की स्तिथि होती है। जब हम इस बार में बात करते हैं LGBTIQ क्या है? ये हममे से बहुत से लोग नहीं जानते हैं, आइये आज जान लेते हैं की क्या है इस का मतलब।

L देखते हैं जो हम LGBTIQ में उसका मतलब होता है Lesbian ये शब्द उन लोगों के लिए उपयोग किया जाता है जो देखने में बिलकुल आम महिलाओं की तरह होती हैं मगर जब बात हो किसी से प्यार करने या अपनी शारीरिक इक्षाओं को पूरा करने की तो ये किसी विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित नहीं होती हैं, मतलब इनको अपनी इन सब इक्षाओं के लिए एक महिला की ज़रूरत होती है, जबकि ये खुद भी एक महिला होती है। इनमें से एक महिला जैसी हरकतें करती हैं, मतलब उनके बाल महिलाओं जैसे होंगे वो महिला जैसे कपडे पहनेंगीं और एक जो दूसरी साथी होती है उसकी वो पुरुषों जैसा पहनावा पहनेगी और उनका व्यवहार भी पुरुषों जैसा ही रहता है।

जो औरतों जैसा व्यहवार करतीं हैं उनको “फेम” कहा जाता है और इनमे जो पुरुषों जैसा व्यवहार करती है उनको “बुच” कहा जाता है।

G जो है LGBTIQ में उसको Gay कहा जाता है, इसे दो पुरुष जो एक दूसरे से प्यार करते हों और अपनी यौन इक्षाओं की पूर्ति के एक दूसरे से करते हो आम तौर पर उन्हें Gay कहा जाता है।

B जो है LGBITIQ में उसे Bysexual कहा जाता है, ये एक अलग तरह के लोग होते हैं वो पुरुष होकर महिला से प्यार कर सकते हैं और पुरुष से भी कर सकते हैं ऐसा सिर्फ पुरुष नहीं महिलाएं भी करती है जिन्हे Bysexual कहा जाता है।

T जो है LGBITIQ में उसे Transgender कहा जाता है, हमारे समाज में जो पूर्ण रूप से महिला या पुरुष ना हो उसको आमतौर पर मज़ाक और अपमान का सामना करना पड़ता है। जबकि ये भी बाकी लोगों की तरह आम इंसान होते हैं। Transgender शब्द अपने आप में एक व्यापक शब्द है इसकी कई परिभाषाएं हैं। एक महिला जो महिला के रूप में है मगर वो महिला नहीं होती वैसे ही एक पुरुष जो पुरुष के रूप में होता है मगर पुरुष नहीं होता इनदोनो स्तिथि को ट्रांसजेंडर कहते हैं। 

जो ना ही पुरुष हो पूरी टिके से ना ही महिला हो पूरी तरीके से उसको ट्रांसजेंडर कहा जाता है ये महिला या पुरुष दोनों के तरफ आकर्षित हो सकते है

I जो है LGBITIQ में उसे Intersex कहा जाता है, कुछ ऐसे बच्चे पैदा होते हैं जिनके पैदाइश के समय उनके लिंग का पता नहीं लग पाता फिर जो डॉक्टर या विशेषज्ञ घोषित कर देते हैं। उन्हें उसी लिंग का यानी महिला या पुरुष मान लिया जाता है उन्हें intersex कहा जाता है।

Q जो है LGBITIQ में उसे Queer कहा जाता है, दरअसल ऐसे इंसान असमंजस में होते हैं उनको ये समझ नहीं आता की उनकी चाहत है क्या ये खुद को ना पुरुष मानते हैं ना महिला न ट्रांसजेंडर न लेस्बियन न ही गे।

कब मिली तीसरे लिंग को कानूनी पहचान

साल में भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में ट्रांसजेंडर को तीसरे लिंग के रूप में पहचान दे दी। इस फैसले के बाद उन्हें सरकारी नौकरियों में शिक्षा और सरकारी योजनओं में जो महिला एवं पुरुष को अधिकार दिए जाते हैं इन्हे भी मिलने लगी।

भारत सरकार का राष्ट्रीय परिषद्

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 (2019 का 40) की धारा 16 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए केंद्र सरकार ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए एक राष्ट्रीय परिषद का गठन किया है जिसकी अधिसूचना 21 अगस्त, 2020 को जारी की गई है। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री इसके अध्यक्ष (पदेन)और केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री इसके उपाध्यक्ष (पदेन)होंगे।

राष्ट्रीय परिषद निम्नलिखित कार्य करेगा, अर्थात्: –

  •  ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के संबंध में नीतियों,कार्यक्रमों,कानून और परियोजनाओं के निर्माण पर केंद्र सरकार को सलाह देना;
  • ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की समानता और पूर्ण भागीदारी हासिल करने के लिए बनाई गई नीतियों और कार्यक्रमों के प्रभाव की निगरानी और मूल्यांकन करना;
  • ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से संबंधित मामलों से जुड़े सभी सरकारी विभागों और अन्य सरकारी तथा गैर-सरकारी संगठनों की गतिविधियों की समीक्षा और समन्वय करना;
  • (घ) ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की शिकायतों का निवारण करना;
  • केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किए गए ऐसे ही अन्य कार्यों को पूरा करना।

परिषद के अन्य सदस्यों में विभिन्न मंत्रालयों / विभागों के प्रतिनिधि,ट्रांसजेंडर समुदाय के पांच प्रतिनिधि, एनएचआरसी और एनसीडब्ल्यूके प्रतिनिधि, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि और गैर-सरकारी संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले विशेषज्ञ शामिल हैं।

राष्ट्रीय परिषद का सदस्य,पदेन सदस्य के अलावा,अपने नामांकन की तारीख से तीन साल के लिए पद पर काम कर सकेगा।

 

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