air-rifle-champion-yashaswani-deswal-kaun-hai

air rifle champion yashaswani deswal kaun hai

air-rifle-champion-yashaswani-deswal-kaun-hai
Yashaswani Deswal

भारत की एयर रायफल चैम्पियन हैं यशस्वनी देसवाल Yashaswani Deswal. इनका जन्म 30 मार्च 1997 के दिन दिल्ली में हुआ था। इनके पिता आईपीएस अफसर हैं, जो की इंडो तिब्बतन बॉर्डर पुलिस में डायरेक्टर जनरल के तौर पर काम कर रहे हैं। इनकी माता जी चीफ इनकम टैक्स कमिश्नर हैं। और ये पंचकूला में काम कर रही हैं। यशस्वनी की पढाई लिखाई चंडीगढ़ के डी ए वी स्कूल से हुई है।

देसवाल का खिलाडी जीवन

खेल से उनका सम्बन्ध बचपन से रहा उनके पिता जोकि खुद भी एक खेलप्रेमी हैं, उन्होंने हमेशा यशस्वनी को खेल के लिए प्रोत्साहित किया। यशस्वनी ने अपनी शुरुवात 10 मीटर एयर पिस्टल शूटर के तौर पर की, उनकी इस रुचि को देखते हुए उनके माता पिता ने पंचकूला में घर पर ही शूटिंग रेंज बनवा दिया, जहाँ वो प्रैक्टिस किया करती थी।

air-rifle-champion-yashaswani-deswal-kaun-hai
Yashaswani Deswal with her coach Dhillon

उनके प्रशिक्षण के लिए उनके पिता के नज़दीकी दोस्त और पूर्व पुलिस महानिदेशक पद से रिटायर टी एस ढिल्लन जो की खुद भी एक अंतर्राष्ट्रीय शूटर रहे हैं। उनको रखा ढिल्लन साहब ने यशस्वनी को ट्रेनिंग दी, उसके बाद पुणे में आयोजित 58 वीं राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप साल 2014 में यशस्वनी ने अलग अलग वर्गों में 3 स्वर्ण पदक जीते। इसके बाद उन्होंने कभी भी पीछे मुद के नहीं देखा एक के बाद एक प्रतियोगिताएं वो जीतती चली गईं।

इस चैंपियनशिप में शानदार प्रदार्शन के बाद यशस्वनी का हौसला और बढ़ गया, उसके बाद उन्होंने साल 2017 के जून महीने में जर्मनी के ज़ुल में आयोजित इंटरनेशनल स्पोर्ट्स शूटिंग फडरेशन में हिस्सा लिया। वहां जूनियर केटेगरी में स्वर्ण पदक जीता और साथ ही साथ विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी की।

ब्राज़ील में साल 2017 में हुए इंटरनेशनल स्पोर्ट्स शूटिंग फडरेशन में स्वर्ण पदक जितना उनका सबसे बड़ा सपना था, इसी जीत ने उन्हें टोक्यो में हुए ओलम्पिक में 10 मीटर एयर पिस्टल खेल में जगह दिलाई थी।

यशस्वनी को एक चैंपियन तो बन गईं थी, मगर उनको पढाई भी पूरी करनी थी अपनी जिसमें उनको बहुत तकलीफ होती थी। वो अपने साथ जहाँ भी जाती अपनी किताबें लेकर जाती मगर पढ़ाने का समय कम ही मिल पता। ना सिर्फ वो खुद इस समस्या से जूझ रही थीं उनके साथ उनके माता पिता भी जूझ रहे थे क्योंकि, वो अपनी बेटी को अकेले नहीं छोड़ते थे वो जहाँ भी जाती प्रतियोगिताओं के लिए। वे भी उनके साथ जाया करते थे शुरुवाती दिनों में।

यशस्वनी की उपलब्धियां

  • देसवाल ने साल 2014 में चीन के नानजिंग में आयोजित समर युथ ओलम्पिक के लिए चुना गया यहाँ वो फाइनल में छटवें स्थान पे रहीं थीं
  • साल 2016 में इंटरनेशनल स्पोर्ट्स शूटिंग फडरेशन में उन्होंने जर्मनी के ज़ुल में जूनियर विश्व कप में रजत पदक जीता इसी साल अज़रबैजान में आयोजित दक्षिण एशियाई खेल में टीम के साथ स्वर्ण पदक जीता और व्यक्तिगत खेलों में उन्होंने कांस्य पदक जीता
  • ब्राज़ील में साल 2017 में हुए इंटरनेशनल स्पोर्ट्स शूटिंग फडरेशन में स्वर्ण पदक जीता और जूनियर विश्व रिकॉर्ड 235.9 की बराबरी की
  • ब्राज़ील में साल 2017 में हुए इंटरनेशनल स्पोर्ट्स शूटिंग फडरेशन में स्वर्ण पदक जीता और टोक्यो ओलम्पिक में अपनी जगह सुनिश्चित की
  • साल 2021 में दिल्ली में हुए इंटरनेशनल स्पोर्ट्स शूटिंग फडरेशन में यशस्वनी ने भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया है इस प्रतियोगिता में उन्होंने 238.8 पॉइंट प्राप्त कर पहला स्थान प्राप्त किया

 

आप ऐसी ही एक भारत की एक बहादुर बेटी नूर इनायत खान की कहानी ज़रूर पढ़िए

article source : https://www.bbc.com/hindi/sport-55667413

 

कैसी लगी आपको ये जानकारी हमें ज़रूर बताएं अगर कोई सुझाव हो हमारे लिए तो आप कमेंट करें धन्यवाद!

 

अगर आप हमारे साथ अपने Article साँझा करना चाहते हैं तो आपका स्वागत है !

 

हमसे जुड़े : Facebook | Telegram 

Leave a Reply

Your email address will not be published.