Saika Ishaque Biography गलियों से निकल कर WPL तक का संघर्ष

Saika Ishaque Biography – पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के पार्क सर्कस इलाके में एक मुस्लिम घर में पैदा हुई सायका इशहाक का सफ़र इतना आसान नहीं रहा जितना वो क्रिकेट के मैदान में नज़र आती हैं. एक रूढ़िवादि मुस्लिम परिवार में एक लड़की का ऐसे घर से निकल कर क्रिकेट खेलना और ऐसा खेलना की उसका नाम Women Cricket World में सम्मान से लिया जाये सचमुच में एक अद्भुत कहानी है.

हम hindeeka में हमेशा कोशिश करते हैं की, आपको आपके सवालो का जवाब हम दे सकें ताकि आप को आपके सवालो के जवाब के लिए कही और ना जाना पड़े आज हम बात करेंगे अपने इस आर्टिकल में सायका इशहाक के बारे में उनका जीवन परिचय, उनकी शुरुवाती ज़िन्दगी, उनका परिवार आदि आइये शुरू करते हैं.

सायका इशहाक का जीवन परिचय | Saika Ishaque Biography

Saika Ishaque Biography

सायका इशहाक का जन्म कोलकाता के पार्क सर्कस इलाके में 8 अक्टूबर 1995 के दिन हुआ था, उनके माता- पिता से सम्बंधित जानकारी अभी कहीं हमे उपलब्ध नहीं हो सकी है जैसे ही हमें वो प्राप्त होगी हम आपको अवगत करवाएंगे. 12 साल की छोटी उम्र से ही सायका ने क्रिकेट ख्लेना शुरू कर दिया था. कोलकाता के मध्य और दक्षिणी जिलों के इलाके को पार्क सर्कस कहा जाता है, जिसमें शहर की कुछ सबसे गरीब झुग्गियों के साथ-साथ पॉश इलाके भी शामिल हैं। सैका इशहाक की कहानी इस अनूठे मिश्रण से उभरती है, जो विपरीत परिस्थितियों पर काबू पाने की दृढ़ता को प्रदर्शित करती है।

नाम सायका इशहाक Saika Ishaque
जन्म तिथि 8 अक्टूबर 1995
जन्म स्थान पार्क सर्कस, कोलकाता
पिता का नाम अभी हमें ज्ञात नहीं है
माता का नाम अभी हमें ज्ञात नहीं है
भाई बहन अभी हमें ज्ञात नहीं है
पेशा क्रिकेट
धर्म मुस्लिम
टीम मुंबई इंडियंस

सायका का क्रिकेट के प्रति लगाव

सायका को क्रिकेट से बचपन से ही लगाव था, उसको आप इस बात से समझ सकते हैं की 12 साल क छोटी सी उम्र से ही उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था. हालांकि एक रुढ़िवादी मुस्लिम परिवार में और उस समाज में इस तरह का काम करना आसान नहीं हा मगर सब परेशानियों से जूझते हुए सायका ने क्रिकेट खेलना जारी रखा. और धीरे धीरे वो पार्क सर्कस से निकल कर भारतीय महिला क्रिकेट में अपना दर्ज करवाने में सफल हुईं. अपनी मेहनत और लगन के परिणाम स्वरुप उनकी वो तेज़ गेंदबाज़ झूलन गोस्वमिन की नज़र में आयी और यहां से उनका करियर चमक गया

महिला प्रीमियर लीग (WPL) में जीत

सायका ने Women Premier League (WPL) में Mumbai Indians के साथ Contract हासिल किया। सायका ने ना केवल मुंबई इंडियंस को जीत दिलाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि इंग्लैंड के खिलाफ हालिया टी20 सीरीज में भारत के लिए शानदार शुरुआत भी की और बाएं हाथ के स्पिनर के रूप में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।

झूलन गोस्वामी ने बताया सायका का संघर्ष

अपने एक इन्टरव्यू में झूलन गोस्वामी ने बताया की, सायका एक बेहद संघर्ष के साथ यहाँ तक पहुंची है. छोटी से उम्र में पिता का साया सर सी उठ जाना गरीबी और एक महिला होने के नाते जो परेशानियां आती है वो तो थी ही मगर सबसे से जूझते हुए लड़ते हुए सायका ने अपना भविष्य क्रिकेट की दुनिया में बनाया सिर्फ 12 साल की उम्र से क्रिकेट खेलना और उसमें आगे चलकर नाम कमाना कोई मज़ाक की बात नहीं है, सायका ने दृढ़ संकल्प और मज़बूत इक्षा के नबल पर ये मुकाम हासिल क्या है.

गली क्रिकेट से लेकर WPL तक

सायका का क्रिकेट पार्क सर्कस की तंग गलियों से शुरू हुआ जहाँ उन्होंने इस खेल में अपना भविष्य बनाने की सोची. तब उनके पिता के दोस्त जो वहां लोकल क्रिकेट क्लब में खेला करते थे, उनसे प्रभावित होकर सायका को भी वहां खेलने भेजने लगे जहाँ सायका ने एक तेज़ गेंदबाज़ के तौर पर खेलना शुरू किया. विवेकानंद पार्क में एक प्रशिक्षक ने उन्हें कहा की वो बाएँ हाथ से स्पिन करना शुरू करने जिसमें उन्हें महारत हासिल हो सकती है, और ऐसा हुआ भी ये उनकी सलाह आज सायका को विवेकानंद पार्क WPL तक ले आई.

डब्ल्यूपीएल: एक निर्णायक मोड़

सायका के करियर में तब एक महत्वपूर्ण पल आया जब उन्हें महिला प्रीमियर लीग WPL में शामिल किया गया, उनके मैदान में प्रदर्शन और उनके विकेट लेने की भूख जो उनको खेलते समय देखने से नज़र आती है, जिसक तारीफ़ ना सिर्फ मैदान में बैठे दर्शक और उनके प्रशंसक करते हैं साथ ही उनके साथी खिलाडी और यहाँ तक की उनके विरोधी भी करते हैं.

परामर्श और मान्यता

झूलन गोस्वामी, जिन्हें सैका को डब्ल्यूपीएल में लाने का श्रेय दिया जाता है, उनके समर्थन के अथक प्रयासों पर प्रकाश डालती हैं। वित्तीय चुनौतियों ने साइका की क्रिकेट आकांक्षाओं को खतरे में डाल दिया, लेकिन उनके बंगाल टीम के साथियों और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल ने यह सुनिश्चित करने के लिए एकजुट हुए कि वह सफलता की राह पर बनी रहें।

विपरीत परिस्थिति पर विजय

सायका की यात्रा असफलताओं के बिना नहीं थी। तीन साल पहले कंधे की चोट के कारण उनके करियर को खतरा पैदा हो गया था, जिसके कारण उन्हें राज्य टीम से बाहर कर दिया गया था। हालाँकि, बंगाल के पूर्व बाएं हाथ के स्पिनर शिबसागर सिंह के मार्गदर्शन से, साइका ने अपनी अदम्य भावना का प्रदर्शन करते हुए एक उल्लेखनीय वापसी की।

एक आशाजनक भविष्य

जैसे-जैसे 2023 में साइका का सितारा बुलंद होता जा रहा है, भारत को बांग्लादेश में आगामी टी20 विश्व कप में उनकी अहम भूमिका की उम्मीद है। झूलन गोस्वामी एक विजयी परिणति की कल्पना करती हैं, जिसमें साइका अपनी मां के सिर पर गर्व और समृद्धि का रत्नजड़ित मुकुट रखती है – लचीलेपन और विजय की एक प्रेरक कहानी।

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