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jhiram ghati hatyakand kab hua tha | kya hai naxalwad

वो दिन था 25 मई साल 2013 का जब छत्तीसगढ़ कांग्रेस के बड़े बड़े दिग्गज नेता परिवर्तन यात्रा में शालिम होकर सुकमा ज़िले से लौट रहे थे तब जगदलपुर ज़िले के दरभा इलाके के झीरमघाटी Jhiram Ghati में 250 नक्सलियों ने घात लगाकर करीब तीन घंटे तक खुनी होली खेली थी जिसमें छत्तीसगढ़ कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और अन्य समेत 35 लोगों ने अपनी जान गवाँ दी थी

वैसे तो हम्रारे देश में हर दिन कहीं न कहीं कोई न कोई ऐसी आतंकवादी या नक्सली घटनाएं तो होती रहती हैं जिनसे दिल सेहम जाता है मगर 25 मई की ये झीराम घाटी की घटना कुछ अलग थी कुछ लोगों का उस समय ये मानना था की ये एक साजिश थी कुछ का कहना था की ये सिर्फ एक नक्सली हमला था

क्या थी झीरम घाटी हत्याकांड जानिए विस्तार से

साल था 2013 का कांग्रेस विधानसभा चुनावों के लिए अपनी तैयारी  में लगी थी जिसके तहत वो पुरे छत्तीसगढ़ में परिवर्तन यात्रा कर रही थी इसी सिलसिले में वो दक्षिण छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में भी परिवर्तन यात्रा की तैयारियों और सभाओं में व्यस्त थी इस यात्रा में छत्तीसगढ़ कांग्रेस इकाई के तमान छोटे बड़े नेता एकत्रित हुए थे

जिनमे उस वक़्त के छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष नन्द कुमार पटेल, बस्तर का टाइगर कहे जाने वाले महेंद्र कर्मा, केंद्र और राज्य के कांग्रेस के कद्दावर नेता विद्याचरण शुक्ल नन्द कुमार पटेल के बेटे दिनेश पटेल कवासी लखमा (वर्तमान में आबकारी एवं उद्योग मंत्री छत्तीसगढ़) आदि शामिल थे

ये सब सुकमा ज़िले से एक सभा को सम्बोधित करके अपने अगले पड़ाव के लिए निकले इस काफिले में सबसे आगे की जो गाडी थी उसमें नन्द कुमार पटेल के पुत्र  दिनेश कुमार पटेल और कवासी लखमा अपने सुरक्षा गार्डों के साथ आएगी बढ़ रहे थे ऐसे ही इनके पीछे अन्य गाड़ियों में कांग्रेसी नेता चल रहे थे

इस काफिले में लगभग 50 लोग शामिल थे सबसे पीछे इस काफिले में वरिष्ठ कांग्रेस नेता विद्या चरण शुक्ल थे शाम के लगभग 4 बजे जैसे ही ये काफिला घने जंगलों से गुज़रता हुआ झीरम घाटी Jhiram Ghati पहुंचा जंगल में बंदूख से निकली गोलियों की आवाज़ें आने लगी चारो तरफ से

जब झीरम घाटी मौत की घाटी में तब्दील हुई

इस अचानक हुए हमले में किसी को कुछ समझ नहीं आया ना ही सभालने का कोई मौका मिला सब लोग दहशत के मारे अपनी अपनी गाड़ियों में अपनी अपनी जगह बैठे रहे घाटी के दोनों तरफ पहाड़ हैं और घने जंगल दोनों तरफ से धुआंधार गोलिया बरसा रहे थे छुपे हुए नक्सली

इस नक्सली हमले में PPC अध्यक्ष नन्द कुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल और उदय मुदलियार समेत कई नेताओं की की मौत हो गई थी सुरक्षाकर्मी भी मौत की घात उतर दिए गए थे वरिष्ठ कांग्रेस नेता विद्या चरण शुक्ल बेहद नाज़ुक हालत में घायल पड़े हुए थे जिन्हे बाद में 17 दिन बाद इलाज के दरम्यान नहीं बचाया जा सका सड़क पर और गाड़ियों में हर जगह लाशें बिखरी पड़ी थी

सारे देश ने अपने टीवी पर समाचार चैनलों के माध्यम से देखा की कैसे नक्सलियों ने झीरम घाटी Jhiram Ghati की हरी भरी घाटी को मौत की काली मनहुस चादर से ढक दिया था एक एक करके कई कई सारे नेताओं सुरक्षा कर्मियों के मौत की खबर आने लगी

ऐसी अन्य जानकारियों आपका इंतज़ार कर रही हैं 

नक्सलियों को थी महेंद्र कर्मा की तलाश

झीरम घाटी Jhiram Ghati की घटना को अंजाम देने के बाद नक्सलियों ने एक बयान जारी करके इस घटना की ज़िम्मेदारी ली और कहा था की उनका इस घटना को अंजाम देने का कारण था सलवा जुडूम और अर्धसैनिक बालों की तैनाती बस्तर संभाग में वो इसका विरोध कर रहे थे

सलवा जुडूम के संस्थापक थे महेंद्र कर्मा और उन्ही के कार्यकाल में बस्तर संभाग में अर्धसैनिक बालों की तैनाती की गई थी इस वजह से नक्सलियों के निशाने पर थे महेंद्र कर्मा

प्रत्यक्ष दर्शियों ने बताया की जब नक्सली हमला करते हुए पहाड़ से निचे उतरे वो तलाश में थे महेंद्र कर्मा की वो आवाज़ दे रहे थे की कहाँ है कौन है महेंद्र कर्मा तब महेंद्र कर्मा अपनी गाडी से निचे उतरे और उन्होंने कहा नक्सलियों से की मैं हूँ महेंद्र कर्मा तुम लोगों को मेरी तलाश है मुझे मार दो मगर इन बेगुनाह लोगों को छोड़ दो फिर नक्सलियों ने उन पर ताबड़ तोड़ गोलियां चला दी और उनकी हत्या कर दी बस्तर का टाइगर खामोश हो गया

Jhiram Ghati men kya hua tha

नक्सलियों ने दिखाई थी बर्बरता

नक्सलियों ने घात लगाकर धोखे से कांग्रेस के नेताओं पर हमला किया था और कई नेताओं समेत सुरक्षाकर्मियों की हत्या निर्ममता से कर दी थी मगर नक्सलियों का बर्बर चेहरा तब सामने आया जबउन्होंने महेंद्र कर्मा को मारा आपको यकीं नहीं होगा की नक्सलियों ने महेंद्र कर्मा पर 78 वार किये थे जब उनका पोस्टमार्टम हुआ तो उनके शरीर पर तेज़ धार वाले हटियारों के कई निशान पाए गए और उनके शरीर से कुल 65 गोलियां निकली गई थीं

सिर्फ नक्सलियों का इतने से ही मन नहीं भरा था वो महेंद्र कर्मा के पार्थिव शरीर को सड़क पर इधर उधर खिंच रहे थे और उनको गालियां दे रहे थे नक्सलियों ने उस दिन सारी हदें पार कर दिन वो उनके पार्थिव शरीर पर चढ़कर नाचकर गाकर खुशियां मन रहे थे

झीरम घाटी घटना के मास्टर माइंड

इस घटना के पीछे क्या वजह थी ये आज तक साफ़ नहीं हो सका बहुत साडी बातें कही गेन उस दरम्यान कांग्रेस ने इस घटना को सोची समझी साजिश बताते हुए सुपारी किलिंग का नाम तक दे दिया था मगर कोई साबुत नहीं मिले किसी बात के नक्सलियों द्वारा किसी राजनैतिक पार्टी पर इतना बड़ा हमला आज तक नहीं किया किया था इस घटना में जिन नक्सलियों पर आरोप लगाया गया वो आज तक पकड़ से बाहर हैं इस घटना में मुख्य रूप से नक्सली नेता रमन्ना और गणेश उइके जोगणना गुड्सा उसेंडी आदि शामिल थे

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