Lal Qila aur Tiranga Jhanda | Tirange jhanda kya hai

देश जब से आज़ाद हुआ है हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी के दिन प्रधानमंत्री लाल किले Lal Qila से तिरंगा फहराते हैं और देश को संबोधित करते हैं देशवासियों में देशभक्ति की भावना का संचार हो जाता है तिरंगे को देखते ही मगर क्या कभी आपने ये सोचा है की कोई भी प्रधानमंत्री हो वो तिरंगा लाल किले से ही क्यों फहराता है ऐसा क्या है लाल किले में ?

हम hindeeka में हमेशा अपने Visitors को ऐसे ही सवालों का जवाब देते हैं जिनके बारे में अक्सर सोचा नहीं जाता और सोचा भी जाता है तो उनका जवाब नहीं मिलता आसानी से आज हम बात करेंगे की भारत के प्रधानमंत्री लाल किले से ही क्यों स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस के दिन तिरंगा झन्डा फहराते हैं ?

क्यों फहराते हैं लाल किले से तिरंगा ?

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दोस्तों हम सब को पता है की देश कई सालों की गुलामी की जंजीरों को तोड़ने में साल 1947 में कामयाब हुआ था दिल्ली सदियों से सत्ता का केंद्र रही है और जब देश आज़ाद हुआ तब उस वक़्त देश अंग्रेजों के हाथों गुलाम था दिल्ली राजधानी थी उनकी और लाल किले Lal Qila पर भी उनका अधिकार बना हुआ था जिसपर वो ब्रिटिश झंडा लगाया करते थे मगर जब देश आज़ाद हुआ तब उनका झंडा उतारकर हमारी शान तिरंगा वहां फहराया गया

देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने पहली बार वहां झंडा फहराया देश के प्रधानमंत्री के तौर पर तब से ये परंपरा बन गया कोई भी प्रधानमंत्री हो स्वतान्रता और गणतंत्र दिवस के दिन वहां झंडा फहराता है और देश की जनता को वहां से सन्देश और शुभकामानाएं देता है

किसने बनवाया था लाल किला ?

जब भी कोई दिल्ली जाता है भारतीय या कोई भी किसी भी देश का सैलानी हो लाल किला Lal Qila ज़रूर देखने जाता है पुरानी दिल्ली में यमुना नदी के किनारे बने इस किले की बनावट भारतीय और मुग़ल वास्तुशैली का एक शाहकार है जिसे पांचवें मुग़ल शशक शाहजहाँ ने बनवाया था

बलुवा लाल पत्थर से बनाया गया इस किले को इस लिए इसे लाल किला कहा जाता है ये तीनों तरफ से यमुना नदी से घिरा हुआ है ये साल 2007 में विश्व धरोहर में भी शामली कर लिया गया है इस इमारत के निर्माण में 10 सालों का समय लगा था जिसे 1638 ईस्वी में बनवाना शुरू किया गया और ये 1648 ईस्वी में बनकर तैयार हुआ था

शाहजहाँ से पहले मुग़ल साम्राज्य की राजधानी आगरा हुआ करती थी जिसे शाहजहाँ ने दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया और आगरा के ताजमहल को बनाने वाले शिल्पकार उस्ताद अहमद लाहौरी को लाल किला बनवाने का काम सौंपा और उन्होंने बहुत महनत के साथ इस इमारत का निर्माण किया 18 वीं सदी में अंग्रेजों ने इस किले पर कब्ज़ा जमा लिया और तब तक काबिज़ रहे जब तक देश आज़ाद नहीं हुआ और के बाद पंडित नेहरु ने ब्रिटिश राज का झंडा उतार कर भारत का तिरंगा झंडा लहराया और देश को संबोधित किया था

तिरंगा क्या है ?

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दुनियाँ में हर देश का एक झंडा होता है जो उस देश की निशानी होता है वैसे ही हमारे प्यारे भारत देश के झंडे को तिरंगा कहा जाता है क्यों की इसमें तीन रंग होते हैं सफ़ेद, केसरिया और हरा इस झंडे के बीच में अशोक चक्र बना होता है जो लाल किले Lal Qila पर हर साल फहराया जाता है

तिरंगा झंडे को किसने बनाया था ?

दोस्तों जिस तिरंगे को देखकर आपके सिने में देशभक्ति की लहर जाग जाती है की आप जानते हैं की उस तिरंगे झंडे को किसने बनाया था अगर नहीं तो हम आपको बता दें की हमारे जान से प्यारे तिरंगे को उसका ये रूप पिंगली वैन्कैयानंद ने दिया था इस तिरंगे को 22 जुलाई 1947 के दिन आयोजित संविधान सभा के दौरान अपनाया गया था

कब फहराया जाता है तिरंगा लाल किले पर

जैसा की आप सब को पता है की तिरंगा झंडा हमारी शान का प्रतिक है इसको स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के दिन देश के प्रधानमंत्री के हाथों लाल किले Lal Qila की प्राचीर पर फ़हराया जाता है ये सीलसीला देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने शुरू किया था जो आज भी कायम है

तिरंगा झंडा कैसा होता है ?

दोस्तों जैसा की हमसब को पता है तिरंगे झंडे में तीन रंग और उन रंगों के बीच अशोक चक्र बना होता है इसमें सबसे ऊपर जो रंग होता है वो केसरिया होता है जोकि शक्ति और साहस को दर्शाता है उसके बाद सफ़ेद रंग शांति और सत्य का प्रतिक है सबसे निचे हरा रंग होता है जो की उर्वरता, वृद्धि और भूमि की पवित्रता का प्रतिक है

तिरंगे में सफ़ेद पट्टी के बीच में गहरे नील रंग का एक चक्र है जिसे धर्म चक्र कहा जाता है ये चक्र मोर्य सम्राट अशोक द्वारा बनाये गए मीनार से लिया गया है जोकि सारनाथ में स्थित है जिन्स्में 24 तीलियाँ बनाई गई है जो की एक दिन के 24 घन्टों के का प्रतीक हैं

भारतीय ध्वज संहिता क्या है ?

दोस्तों शायद आपको ये जानकार हैरानी हो की भारत में तिरंगे झंडे को लेकर भी कानून है जिसमें संसोधन किया गया है साल 2002 में अब कोई भी देश का नागरिक कहीं भी किसी जगह भी शैक्षणिक संस्थानों, कारखानों, कार्यालयों या फिर अपने घरों में ध्वजारोहण कर सकता है हाँ मगर उसको इस बात का ख्याल सख्ती के साथ रखना होगा की राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान में किसी तरह की क ओई कोताही नहीं बरती जाए

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज संहिता 2002 को सुविधा के अनुसार तीन भागों में बांटा गया है जिसमें

  1. पहले भाग में विस्तार से ये समझाया गया है की राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान कैसे करना है
  2. आम जनता शैक्षणिक संस्थानों कार्यालयों निजी संगठनों आदि को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के नियम बताये गए हैं
  3. सहिंता का तीसरा भाग केन्द्रीय और राज्य सरकारों तथा उनके संगठनों और अभिकरणों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज के प्रदर्शन के विषय में जानकारी देता है

क्या है भारतीय ध्वज से जुड़े नियम ?

भारतीय ध्वज को साल 2002 से पहले को भी सामान्य नागरिक राष्ट्रिय पर्व के अलावा कभी भी नहीं फहरा सकता था भारतीय ध्वज संहिता 2002 में इस नियम में कुछ बदलवा किये गए जो इस प्रकार हैं

  • देश का कोई भी नागरिक भारतीय ध्वज को फहरा सकता है कभी भी कहीं भी मगर शर्त ये है की ध्वज की गरिमा और उसके सम्मान का पूरा ख्याल रखा जाए
  • भारतीय ध्वज संहिता 2002 की धारा 2 के अनुसार कोई भी नागरिक अपने परिसर में (निजी औद्योगिक शैक्षणिक संस्थान) में ध्वजारोहण कर सकता है
  • राष्ट्रीय ध्वज को राजनैतिक लाभ सांप्रदायिक लाभ किसी तरह के पर्दों किसी तरह के परिधानों में उपयोग नहीं किया जा सकता और मौसम का ख्याल भी रखना होगा सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक ही ध्वज फहराया जा सकता है
  • राष्ट्रीय ध्वज को किसी ज़मीन, फर्श या पानी से बचाया जाना चाहिए इसे किसी भी वाहन के ऊपर निचे अगल बगल नहीं लगाया जाना चाहिए इसको किसी भी रेल नाव या वायुयान पर नहीं लपेटा जा सकता
  • किसी भी ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज से ज्यादा ऊंचाई पर नहीं लगाया जा सकता तिरंगे ध्वज को वंदनवार, ध्वज पट्ट या गुलाब के समान संरचना बनाकर उपयोग नहीं किया जा सकता
राष्ट्रीय ध्वज संहिता 2002 किसकी वजह से बनाया गया

साल 2002 से पहले देश में सिर्फ राष्ट्रीय पर्व के दिन ही आम लोग राष्ट्रीय ध्वज तिरेंगे को फहरा सकते थे मगर भारत के जाने माने उद्योगपति नविन जिंदल ने अपने कार्यालय की छत पर तिरंगा फेहरा दिया तुरंत ही झंडे को ज़ब्त कर नविन जिंदल पर मुकदमा दायर कर लिया गया जिंदल ने बहस की कि एक नागरिक के रूप में मर्यादा और सम्मान के साथ झंडा फहराना उनका अधिकार है और यह एक तरह से भारत के लिए अपने प्रेम को व्यक्त करने का एक माध्यम है उनकी इस दलील को मानते हुए तत्कालीन केंद्र सरकार ने भारतीय झंडा संहिता में 26 जनवरी 2002, को संशोधन किए जिसमें आम जनता को वर्ष के सभी दिनों झंडा फहराने की अनुमति दी गयी और ध्वज की गरिमा, सम्मान की रक्षा करने को कहा गया

तिरंगा झंडा फहराने से पहले जान ले ये बातें

दोस्तों हर भारत वासी के लिए तिरंगा झंडा सिर्फ तीन रंगों का सिर्फ एक कपडा ही नहीं है बल्कि वो हमारी शान है हर कोई चाहता है की वो भी अपने घर या अपने संस्थानों में तिरंगा झंडा फहराए और वो ऐसा कर भी सकता है मगर जब भी आप तिरंगा झंडा फेहराने की सोचे तो कुछ बाते ज़रूर ध्यान में रखें

  • सरकारी दफ्तरों में रविवार एवं अन्य छुट्टियों के दिन भी सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तिरंगा फहराया जा सकता है विशेष परिस्तिथियों में तिरनेगे को रात भर भी फहराया जा सकता है
  • तिरंगा केवल राष्ट्रीय शोक के समय ही आधा झुकाया जा सकता है
  • तिरंगे पर कुछ भी लिखना या छापना सख्त मना है
  • गन्दा या ज़रा सा भी फटा हुआ तिरंगा फहराया नहीं जा सकता
  • अगर तिरंगा किसी अधिकारी के गाडी में लगाया जाए तो वो हमेशा गाडी के सामने लगा हो और हमेशा गाडी के दायी ओर लगा होना चाहिए
  • तिरंगा हमेशा फुर्ती के साथ फहराया जाना चाहिए और जब भी उतारा जाए तिरंगे को बड़े आराम से आहिस्ता आहिस्ता उतारा जाना चाहिए

हर घर तिरंगा अभियान क्या है ?

दोस्तों साल 2022 में हम अपनी आज़ादी के 75 वीं वर्षगाँठ मनाने जा रही है 15 अगस्त के दिन जिसे प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने आज़ादी का अमृत महोत्सव का नाम दिया है इस मौके को खास बनाने के लिए नरेंद्र मोदी ने ये अपील किहे देश वासियों से की वो 13 से 15 अगस्त तक अपने अपने घरों में तिरंगा झंडा लगाये हर घर तिरंगा अभियान के अंतर्गत देश भर में 25 करोड़ घरों में झंडा फ़हराया जायेगा

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