taliban kaun hain | talibaan ka itna khauf kyon hai

15 अगस्त 2021 के दिन तालिबान Taliban ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में अपना झंडा लहरा दिया यानी उन्होंने फिर से 20 साल बाद इस देश पर अपना कब्ज़ा कर लिया दुनिया के देखते देखते पुरे अफगानिस्तान में हालत बदल गई किसी ने नहीं सोचा होगा की अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश के साथ 20 साल चले युद्ध के बाद भी तालिबान बचे होंगे मगर सबको हैरत में डालते हुए उन्होंने ये कारनामा कर दिखाया अब एक सवाल उठता है की कौन है ये तालिबान क्या ये किसी दूसरे देश के रहने वाले आतंकवादी है जिन्होंने अफगानिस्तान पर कब्ज़ा कर लिया या ये लोग वहीँ के रहने वाले विद्रोही हैं जो अपने देश में अमेरिका के कब्ज़े के बाद अपने देश को अपने हाथ में ले लिया आज हम जानेंगे कौन हैं ये तालिबान कहाँ से आये हैं और क्या चाहते हैं क्या रहा है इनका इतिहास

तालिबान कौन है Who is Taliban

तालिब का अर्थ होता है पढ़ने लिखने वाला विद्यार्थी तालिबान Taliban का शाब्दिक अर्थ हुआ विद्यार्थियों का एक समूह तालिबान पाकिस्तान के मदरसों में पढ़ने वाले लड़के थे शुरुवाती दिनों में जिनका सम्बन्ध पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों देशों से था हुआ कुछ ये की साल 1990 के में जब सोवियत सेना अफगानिस्तान से वापस चली गई तब अफगानिस्तान में राजनैतिक अफरातफरी मच गई हर तरफ भष्टाचार आतंक लूटपाट मचा हुआ था एक कबीला दूसरे कबीले पर हमले कर रहा था जिससे आम लोगों की ज़िन्दगी तबाह हो गई थी ऐसे में ये विद्यार्थियों का समूह तालिबान ने अफगानिस्तान की स्तिथि को अपने हाथ में लिया और सब गड़बड़ियों को सुधारना शुरू कर दिया ये तालिबान कट्टर मुस्लिम थे जोकि शरीया कानून लागु करना चाहते थे इनकी पढाई लिखाई मुस्लिम कट्टर विशेषज्ञों ने करवाई थी इनकी आर्थिक मदद सऊदी अरब से हुई थी उन शुरुवाती दिनों में 

शुरुवात में अफगानिस्तान की जनता ने इनको सर आँखों पर बिठाया था क्योंकि ये उथलपुथल भरे माहौल से देश को स्थिर करने में कामयाब हुए थे लेकिन कुछ समय बाद जब ये अपनी कट्टर विचारधारा को लोगों पर थोपने लगे तब उनका असली चेहरा अफगानियों के सामने आया मगर तब तक तालिबान की जड़ें अफगानिस्तान में इतनी मजबूत हो गई थी की उन्हें यहाँ से हटाना या उनका विरोध करना किसी के बस की बात नहीं रह गई थी

तालिबान की स्थापना किसने की

सोवियत रूस का कब्ज़ा हो गया था अफगानिस्तान में जिसे तालिबान Taliban खत्म करना चाहते थे इसी बीच अमेरिका ने तालिबान को पैसे और हथियार दिए और उनसे कहा की रूस अफगानिस्तान से इस्लाम का ख़ात्मा कर देगा इसी इरादे से वो यहाँ आया है कॉलेज में पढ़ने वाले जोशीले नौजवानों में से एक था मुल्ला उमर इसी ने अमेरिका की मदद ली और रूस को अपने देश अफगानिस्तान से भागने के लिए अपने साथियों को जमा किया इस ग्रुप को नाम दिया गया तालिबान क्योंकि इस ग्रुप में सभी पढ़ने लिखने वाले लड़के थे मगर वो चाहते थे अपने देश किओ बचाना विदेशियों से आज जो अमेरिका तालिबान का खून का प्यासा है वही कभी उसको पैसे और हथियार दे रहा था ताकि वो रूस से लड़े

तालिबान इतना खूंखार संगठन क्यों है

आज कल जहाँ जाइये आम चर्चा का विषय बना हुआ है तालिबान Taliban भले ही हम भारत में सुरक्षित हों मगर यहाँ भी उसी की बात हो रही है समाचार माध्यमों के ज़रिये जो नज़र आ रहा है उसमें अफगानिस्तान के सभी नागरिक इतने बेचैनी में नज़र आ रहे हैं जैसे उन्हें एक साथ ही अफगानिस्तान छोड़ देना है लोग बस और एयरोप्लेन का अंतर भी भूल गए हैं इसी बात से अंदाज़ा लगाया जा सकता है की तालिबान क्या है

तालिबान के जितने लड़ाके और उनके कमांडर हैं वो सभी सिर्फ मदरसों में पढ़े हैं कुछ को तो वो पढाई भी नसीब नहीं हुई है उनको जो पढ़ाया गया है उसका आज कल की दुनिया में कोई ख़ास काम नहीं है दरअसल वो धार्मिक किताब क़ुरआन की पढाई करते हैं जिसको पढ़ने और सही तरीके से समझने के लिए एक सही गुरु की ज़रूरत होती है जो उन्हें उसके मायने सही तरीके से समझाए मगर होता इसका उलट है जो उन्हें पढ़ते हैं वो इंसान को इंसान से जोड़ने की प्यार मुहोब्बत की बात नहीं करते वो मार काट की बात करते हैं और क़ुरआन शरीफ की आयतों को अपने हिसाब से इस्तेमाल कर उन्हें पढ़ते हैं

उनका केवल एक ही सपना है वो अफगानिस्तान और दुनिया में शरीयत या शरीया कानून  लागु करना चाहते हैं जिसके लिए वो किसी हद तक गुज़र जाने को तैयार बैठे हैं उनको लगता है वो जो कर रहे हैं वो जिहाद है और अगर उनकी उसमें मौत हो गई तो वो मरेंगे एक शहीद की मौत और अल्लाह उनकी शाहदत क़ुबूल करेगा जिसे बदले में उन्हें जन्नत मिलेगी अपनी इन्ही मान्यताओं की वजह से वो जान लेने और देने से नहीं हिचकिचाते जिसकी वजह से वो खतरनाक हो जाते हैं

कौन है हैबतुल्लाह अखुनजादा Who is Haibatullah Akhundzada

वफादारों का नेता जी हाँ यही कहकर हैबतुल्लाह अखुनजादा को उसके तालिबान Taliban समर्थक और लड़ाके पुकारते हैं अभी हैबतुल्लाह तालिबान का सबसे बड़ा सरदार नेता है हैबतुल्लाह ही है जिसके हाथों में तालिबान से जुड़े धार्मिक सामाजिक और राजनैतिक फैसले लेने का अधिकार हैं साल 2016 में अमेरिका के एक ड्रोन हमले में अख्तर मंसूर के मरे जाने के बाद हैबतुल्लाह तालिबान का सबसे बड़ा नेता बना इससे पहले वो पाकिस्तान के एक शहर में मदरसे में बच्चों को तालीम दिया करता था और  मस्जिद में नमाज़ पढ़ाया करता था

कौन है मुल्ला मुहम्मद याक़ूब Who is Mulla Muhammad Yaqub

तालिबान का गठन करने में जो नाम दूसरे नम्बर पर आता है वो है मुल्ला मुहम्मद उमर अब उसका बेटा मुल्ला मुहम्मद याक़ूब तालिबान Taliban के दूसरे सबसे प्रभावशाली नेता के रूप में जाना जाता है तालिबान के लड़ाकों को याक़ूब के हुक्म का इंतज़ार होता है उसकी मर्ज़ी के बिना तालिबान की दुनिया में एक पत्ता भी नहीं हिलता अब सवाल ये है की जब वो इतना बड़ा नेता है तालिबान का तो उसकी जगह अखूनजदा को तालिबान का प्रमुख क्यों बनाया गया जानकार कहते हैं क्योंकि उस वक़्त याक़ूब की उम्र काम थी और उसको अनुभव भी नहीं था इस लिए अखूनजदा को तालिबान का प्रमुख बनाया गया हालांकि ये बात गौर करने वाली है की तालिबान की गद्दी का हक़दार सिर्फ अभी मुल्ला मुहम्मद याक़ूब ही है

कौन है सिराजुद्दीन हक़्क़ानी Who is Sirajuddin Haqqani

जिसने तालिबान का नाम सुना होगा उसने ज़रूर कभी न कभी जलालुद्दीन हक़्क़ानी का नाम सुना ही होगा जलाउद्दीन हक़्क़ानी तालिबान का एक प्रमुख कमांडर था जिसके जिम्मे तालिबान का सारा हिसाब किताब आय व्यय का होता था उसी का बेटा है सिराजुद्दीन हक़्क़ानी जो अब अपने बाप की जगह पर है और हक़्क़ानी नेटवर्क का मुखिया भी है वही हक़्क़ानी नेटवर्क हवाला कारोबार में भी सक्रिय है जिसको पाकिस्तान से भी समर्थन प्राप्त है ये नेटवर्क कितना खतरनाक है आप इस बात का अंदाज़ा इस बात से लगा सकते हैं की अमेरिका ने इस पर 70 करोड़ रूपए का इनाम भी रखा हुआ है 

कौन हैं मुल्ला अब्दुल गनी बरादर Who is Mulla Abdul Ghani Baradar

तालिबान जब अपनी शक्ल ले रहा था तब उस वक़्त इसकी संरचना में मुल्ला अब्दुल गनी बरादर की भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका थी तालिबान की राजनैतिक शाखा का प्रमुख है ये अभी हालहीं में चीन के दौरे पर भी गया था तालिबान की तमाम राजनैतिक गतिविधियों का ज़िमा बरादर के हाथों में हैं दोहा में हुए शांति समझौते के लिए भी बरादर ही गया था 

कौन है शेर मुहम्मद अब्बास स्टाजिनिक Who is Sher Mohammad Abbas Stanikzai

साल 2001 में जब अफगानिस्तान में तालिबान ने अपना शासन कायम किया और सरकार का गठन किया तब उसके मंत्री मंडल में शेर मुहम्मद अब्बास स्टाजिनिक भी मंत्री था साल 2015 में इसे तालिबान का राजनितिक चेहरा बना कर दुनिया के सामने पेश किया गया

कौन है अब्दुल हाकिम हक़्क़ानी Who is Abdul Hakim Haqqani

अब्दुल हकीम हक्कानी तालिबान के वार्ता दल का प्रमुख है। ये तालिबान का पूर्व शेडो चीफ रहा चुका है। वहीं ये तालिबान की अदालत का प्रमुख भी है। रिपोर्ट के मुताबिक अब्दुल हकीम हक्कानी तालिबान प्रमुख अखुनजादा का काफी करीबी है।

 

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