Ismat Chughtai kaun hai | Ismat Chughtai lihaaf

बात उस ज़माने की है जब लोग महिलाओं की बातें घर से बाहर तक नहीं किया करते थे उस ज़माने में एक महिला और वो भी मुस्लिम महिला लिख रही थी महिलाओं की समस्याएं उनकी निजी ज़िन्दगी से जुडी ऐसी बातें जो करना तो क्या उनके बारे में सोचना भी गुनाह था आज हम बात करने वाले है उर्दू साहित्य की सबसे चर्चित महिला जिसको समाज ने कभी सही तरीके से अपनाया नहीं क्योंकि उन्होंने लिखा लड़कियों और महिलाओं कि उन भावनाओं को जिन्हे वो खुद भी किसी के सामने ज़ाहिर नहीं करती उनकी दबी कुचली इन अधूरी ख्वाहिशों को उस जमे में आवाज़ दी थी इस्मत आपा ने इस्मत चग़ताई Ismat Chughtai करीबी और बहुत से लोग उनको इस्मत आपा कहकर पुकारते हैं इस्मत की लिखी एक कहानी लिहाफ की वजह से उनपर मुक़दमा तक चला आइये आज जान लेते हैं कौन हैं इस्मत चुग़ताई कैसी थी उनकी ज़िन्दगी

इस्मत चुग़ताई Biography of Ismat Chughtai

ismat chughtai

उत्तर प्रदेश का बदायूं शहर हमेशा से शायरों साहित्यकारों की जन्मस्थली रहा है देश के एक बड़े शायर जैसे शकील बदायुनी भी इसी शहर के थे खैर ये इत्तेफ़ाक़ भी हो सकता है इस्मत चुग़ताई Ismat Chughtai का जन्म 21 अगस्त 2015 के दिन बदायूं शहर में जनाब मिर्ज़ा क़ासिम बेग उनके पिता और नुसरत खानम उनकी माँ  के घर पर हुआ उस समय उत्तर प्रदेश को यूनाइटेड प्रॉविन्सेस कहा जाता था इस्मत अपने माँ बाप की 9 वीं संतान थीं उनके 6 भाई और 4 बहने थी

पिता यानि मिर्ज़ा क़ासिम बेग एक ब्रिटिश सरकारी कर्मचारी थे उनका हर कुछ महीनो में एक शहर से दूसरे शहर ट्रांसफर हो जाया करता था उनका ज़्यादातर वक़्त जोधपुर आगरा और अलीगढ में गुज़रा उनका बचपन ज़्यादातर अपने भाइयों के साथ गुज़ारा क्यों की उनकी बहनों की शादी बहुत जल्दी कर दी गई थी उनके बड़े भाई जिनका नाम मिर्ज़ा अज़ीम बेग चुग़ताई था जो एक उपन्यासकार थे उनक ऐस्मत के साथ बहुत लगाव था उनके पिता मिर्ज़ा क़ासिम बेग ब्रिटिश सरकार में एक सिविल सर्वेंट के तौर पर काम किया और रिटायर हुए उसके बाद वो आगरा में बस गए

इस्मत की पढाई लिखाई

चूँकि अलीगढ शुरू से पढाई लिखाई के लिए जाना जाता था इस्मत Ismat Chughtai की शुरुवाती पढाई लिखाई भी अलीगढ विश्वविद्यालय के महिला कॉलेज से हुई उसके बाद उन्होंने साल 1940 में Isabella Thoburn College से आर्ट्स सब्जेक्ट में ग्रेडुएशन किया ये उस ज़माने की बात है जब मुस्लिम घरों में परदे का बहुत चलन हुआ करता था तो अब आगे की पढाई का कोई सवाल नहीं उठता था मगर इस्मत अभी और पढ़ना चाहती थीं घर वालों के नाराज़ होने के बावजूद उन्होंने अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से अपनी Bachelor of Education की पढाई पूरी की

अपनी पढाई लिखाई ज़माने में ही Progressive Writers’ Association से जुड़ गई जहाँ उनकी मुलाक़ात राशिद जहाँ से होने लगी जो आंदोलनों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती थी इनका असर इस्मत के पूरी शख्सियत पर पड़ा रशीद जहाँ ने ही इस्मत को लिखने के लिए प्रेरित किया वो लिखने भी लगी थी उस दरम्यान लिखा उन्होंने बहुत कुछ उस समय मगर कभी पाने लिखे को प्रकाशित नहीं करवाया था

इस्मत चुग़ताई का लेखन

वैसे तो इस्मत ने लिखना बहुत पहले हिशुरु कर दिया था मगर कभी अपने लिखे को छपवाने की उन्होंने ने नहीं सोची फिर 1939 में उस ज़माने की एक महूर उर्दू पत्रिका साक़ी के लिए उन्होंने फसादी (The Troublemaker) नान से एक नाटक लिखा जो उनका पहला काम था जो छापा था फसादी बहुत चर्चा में रहा था मागरकुछ लोगों ने ये समझा की ये नाटक उनके भाई का लिखा हुआ है जिसकी परवाह उन्होंने नहीं की और वो अपना काम लगातार करती रहीं उसके बाअद उन्होंने कई समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में अपने आर्टिकल कहानियां लिखीं

उनकी शुरुवाती कुछ कहानियां बचपन, काफिर, ढींढ थीं जो उन्होंने लिखीं थीं एक पत्रिका के लिए उन्होंने एक आर्टिकल लिखा जिसका जवाब उस पत्रिका के प्रबंधन ने उन्हें दिया की उनका ये आर्टिकल इस्लाम के सिद्धांतों और क़ुरआन शरीफ के खिलाफ है

Ismat Chughtai  का पहला नावेल “ज़िद्दी” है जिसको उन्होंने उम्र के 20 साल में लिखी थी इस नावेल में एक घर में काम करने वाली नौकरानी और उसके मालिक के बेटे के बीच प्रेम संबंधों की कहानी है इसके बाद इस्मत प्रेम संबंधों के इर्द गिर्द कहानियां लिखने लगी इस सिलसिले में उनकी मुलाक़ात हिजाब इम्तियाज़ अली से हुई वो उनके लेखन से काफी प्रभावित थीं उनकी कहानियों में अकसर ये देखा जाता था की महिलाएं पुरुषों नहीं बल्कि महिलाओं द्वारा ही बनाई गई ज़ंजीरों से खुद को आज़ाद करना चाहती हैं उनकी लिखी हुई ज़िद्दी बाद में इंग्लिश में ट्रांसलेट की गई जिसका नाम दिया गया Wild at Heart फिर साल 1948 में इसी नाम से एक फिल्म भी बनाई गई

 

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इस्मत किन लेखकों से प्रेरित रहीं

इन सब के अलावा इस्मत Progressive Writers’ Association से जुडी रही इस जुड़ाव का बहुत गहरा असर उनकी लिखावट पर पड़ने लगा था जहाँ उन्हें सज्जाद ज़हीर, साहिबज़ादा महमूदुज़फ़र और अहमद अली सहित कई उर्दू लेखकों के द्वारा लिखी कई कहानियों को पढ़ने उनसे सिखने का मौका मिला

वो अन्य कुछ लेखकों से भी काफी प्रभावित थी जिनमे मुख्य रूप से विलियम सिडनी पोर्टर, जॉर्ज बर्नार्ड शॉ और एंटोन चेखव जैसे लेखक शामिल थे चुग़ताई की कल्याण 1941 में और घाव 1942 में प्रकाशित हुई

इस्मत चुग़ताई की निजी ज़िन्दगी

इस्मत Ismat Chughtai ने अपनी Bachelor of Education की पढाई पूरी कर ली थी उसके बाद उन्होंने अलीगढ में एक गर्ल्स स्कूल की हेडमिस्ट्रेस के लिए आवेदन किया उसको उस पद के लिए चुना गया उसी दरम्यान उनकी मुलाक़ात शहीद लतीफ़ से हुई जहाँ धीरे धीरे उनकी दोस्ती हुई लतीफ़ अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की पढाई कर रहे थे अलीगढ में भी उन्होंने लिखना बंद नहीं किया फिर बाद में 1942 में वो बॉम्बे (अब मुंबई) चली आईं जहाँ उन्होंने एक में काम करना शुरू कर दिया इसी साल शईद लतीफ़ के साथ उन्होंने शादी कर ली अब वो बॉलीवुड फिल्मों मने संवाद लिखने का काम करने लगीं थीं इस शादी से उन्हें दो औलादें हुई दोनों लडकियां एक का नाम सीमा सावहनी और दूसरी का नाम सबरीना लतीफ़ है

लिहाफ और इस्मत चुग़ताई

लिहाफ शायद इस्मत चुग़ताई की सबसे विवादित लघु कथा रही लाहौर से छपने वाली एक पत्रिका अदब -ए- लतीफ़ में 1942 में  लिहाफ का प्रकाशन हुआ जैसे ही ये लोगों के हाथ में पड़ी जैसे सारे देश में बवाल हो गया इसमें ऐसे विषय को छुआ गया था इस्मत की क़लम से की ये बवाल उस ज़माने में होना ज़रूरी था

इस लघु कथा में महिलाओं के समलैंगिक रिश्ते के बारे में विस्तार से बताया गया था कहानी है अलीगढ के के नवाब और उनकी बीवी की इसमें एक मुख्य किरदार बेग़म की मालिश करने वाली का  भी है बेग़म जान की शादी नवाब के साथ हो जाती है मगर वो शारीरिक रूप से अपने पति से संतुष्ट नहीं हो पाती ऐसी कुछ कहानी है

ये बहुत विवादित विषय था और आज भी है मगर ज़रा सोचिये उस वक़्त क्या आग लगी होगी इस कहानी को पढ़ कर इसका नतीजा हुआ ये कोई इस्मत के खल्फ अदालत में किसी ने मुक़दमा कर दिया लाहौर उच्च न्यायालय में कोर्ट ने उनकी इस रचना को अश्लील कहा सआदत अली मंटों  को भी इसी तरह की परेशानी से गुज़ारना पड़ा जब उनकी किताब “बू” को भ्ही अश्लील साहित्य की श्रेणी में  रखा  गया दोनों एक साथ अपने अपने मुक़दमों के लिए लाहौर गए थे उनपर समाज में अश्लीलता फ़ैलाने के गंभीर आरोप लगे मगर उन्होंने लिखना बंद नई किया इतने गंभीर आरोप के बावजूद अदालत ने उन दोनों को बरी कर दिया 

इस्मत चुग़ताई से जुडी कुछ अन्य जानकारियां

  • 1942 में लाहौर की एक पत्रिका में छपी उनकी कहानी ” लिहाफ” से उनको शौहरत मिली और इसी लिहाफ की वजह से उनपर मुक़दमा भी चला
  • सबसे पहली फिल्म 1943 में ‘छेड़-छाड़’ आई और उनकी आखिरी फिल्म ‘गर्म हवा’ थी जो 1973 में रिलीज हुई। इस फिल्म ने खूब कामयाबी हासिल की और इस्मत चुगताई को कई अवॉर्ड्स भी मिले
  • इस्मत चुग़ताई को साहित्य अकादमी अवॉर्ड, नेहरू अवॉर्ड जैसे कई दूसरे अहम सम्मान भी मिले। इस्मत चुगताई को महिलाओं के हक की आवाज उठाने और उनके मुद्दों को कहानियों के जरिए समाज के सामने रखने के लिए जाना जाता है
  • 1976 में उन्हें भारत सरकार की तरफ से प्रतिष्ठित पद्मश्री अवॉर्ड मिला।
  • इस्मत चुगताई की मुख्य कहानियों में छुई-मुई, चोटें, कलियां, एक बात, शैतान जैसी कृतियां शामिल हैं। उन्होंने जिद्दी, जंगली कबूतर, अजीब आदमी, मासूमा और टेढ़ी लकीर जैसे कई उपन्यास भी लिखे। इसके अलावा उनकी आत्मकथा ‘कागजी है पैरहन’ नाम से प्रकाशित हुई
  • इस्मत आपा की 107 वीं साल ग़ैरह के मौके पर गूगल ने विशेष डूडल बनाया था 21 अगस्त 2018 के दिन
लिहाफ पर बन रही है फिल्म

इस्मत आपा की लिहाफ पर फिल्म बानी है जो की Voot पर दिखाई जा रही है इस फिल्म को बनाया है राहत काज़मी ने इस फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में तनिष्ठा चटर्जी, सोनल सहगल और अनुष्का सेन हैं।

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