मेजर मोहित शर्मा

मेजर मोहित शर्मा Major Mohit Sharma भारतीय थल सेना के अधिकारी थे, जो 21 मार्च 2009 को जम्मू – कश्मीर के कुपवाड़ा ज़िले में हिज्बुल मुजाहिदीन आतंकवादी संगठन का सामना करते समय अपनी टीम का नेतृत्व करते हुए शहीद हो गए थे। उनकी इस शहादत के लिए उन्हें भारतीय सेना का सर्वोच्च सम्मान अशोक चक्र से 26 जनवरी 2009 के दिन मरणोपरांत सम्मानित किया गया।
21 मार्च 2009 के दिन जम्मू – कश्मीर के कुपवाड़ा ज़िले में हफरूदा के जंगलों में आतंकवादियों के होने की ख़बर मिली तब मोहित शर्मा अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे जहाँ अचानक आतंकियों ने हमला कर दिया उस हमले में मेजर ने अपने 2 साथियों को बचा लिया मगर किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया वो बन्दुक की एक साथ कई गोलियों का शिकार बन गए ये गोलियां बनी उनकी शहादत की वजह।
उन्होंने ना सिर्फ अपने साथियों की जान बचाई और ना सिर्फ शहीद हुए उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए 25 आतंकियों से लोहा लिया और उनमे से 4 को मौत के घाट भी उतारा इस घटना में उनके साथ 8 और साथी भी शहीद हो गए थे।
उनका प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

मोहित शर्मा Major Mohit Sharma का जन्म 13 जनवरी सन 1978 के दिन हरियाणा के रोहतक ज़िले में हुआ था उनके पिता का नाम श्री राजेंद्र प्रसाद शर्मा और माता जी का नाम श्रीमती सुशीला शर्मा है उनको प्यार से घर में सब चिंटू कहकर पुकारा करते थे। वो पढाई लिखाई में बहुत अच्छे थे, उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मानव स्थली स्कूल दक्षिण एक्सटेंशन दिल्ली से की उसके बाद वो हॉली एंजल स्कूल साहिबाबाद गए, 12 वी तक की शिक्षा के लिए DPS ग़ाज़ियाबाद गए, जहाँ से उन्होंने सन 1995 में अपनी 12 वी परीक्षा पास की उसी दौरान वो NDA की प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए थे।
उसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र के संत श्री गजानन्द कॉलेज में इंजीनियरिंग में दाखिला लिया, जब वो कॉलेज में पढाई कर रहे थे उसी दरम्यान उनका NDA का रिजल्ट आ गया। उन्होंने NDA का विकल्प चुना अपनी इंजीनियरिंग कॉलेज की पढाई बीच में छोड़कर भारतीय सेना में शामिल हो गए
वो ना सिर्फ एक अच्छे विद्यार्थी थे साथ ही उन्हें गाने गाने और कई सारे Musical Instrument बजाने का भी शौक था वो गिटार, माउथ ऑर्गन और सिन्थेसाइज़र बहुत ही अच्छे तरीके से बजा लिया करते थे और साथ ही वो हेमंत कुमार के गाने भी बहुत शौक से गया करते थे उनको अपनी इस कला के प्रदर्शन का भी बहुत शौक था वो बिना शर्माए लोगों के सामने गाया करते थे
थल सेना और मेजर मोहित शर्मा

संत श्री गजानन्द महाराज इंजीनियरिंग कॉलेज में अपनी पढाई के दौरान उनका NDA का परिणाम घोषित हो गया उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की पढाई बीच में छोड़कर NDA को चुना और भारतीय थल सेना में शामिल हो गए
वो अपनी NDA के प्रशिक्षण के दौरान हर तरह की गतिविधियों में भाग लिया करते थे उनमे से प्रमुख रूप से वो बॉक्सिंग, तैराकी और घुड़सवारी में हिस्सा लिया करते थे वो जब घुड़सवारी किया करते थे तब उनका एक ख़ास घोडा हुआ कर्त्य था जिसका नाम “इंदिरा” था उनको घुड़सवारी का प्रशिक्षण कर्नल भवानी सिंह दिया करते थे उनके मार्गदर्शन और अपनी कठोर परिश्रम के वजह से वो घुड़सवारी में चैंपियन बने साथ ही वो Boxing के Feather Weight Category में भी चैम्पियन बने
National Defense Academy में अपनी पढ़ी पूरी करने के बाद मोहित ने सन 1998 में Indian Military Academy में दाखिल हो गए वहां भी उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए Battalion Cadet Adjutant के पद से सम्मानित किया गया था और साथ ही उन्हें तीनो सेनाओं के प्रमुख तत्कालीन भारतीय राष्ट्रपति महामहिम श्री के आर नारायणन से राष्ट्रपति भवन में मिलने का मौका भी मिला जहां उन्हें 11 दिसम्बर 1999 के दिन Commission सौंपा गया।
कैसे हुए थे शहीद मेजर मोहित शर्मा
11 दिसम्बर 1999 को उनको Commission प्राप्त होने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग 5th Battalion The Madras Regiment में हैदराबाद में हुई। जहाँ उन्होंने 3 सालों तक देश की सेवा की उसके बाद उन्हें भारतीय सेना के विशेष दस्ता Para Special Force के लिए चयनित किया गया सन 2003 में मोहित एक प्रशिक्षित Para Commando बन गए।
उस समय वो कश्मीर में तैनात थे, जहाँ उन्होंने देश की सेवा की और साथ ही अपने साथियों का नेतृत्व भी किया अपनी निस्वार्थ देशभक्ति के लिए उन्हें सेना पदक से भी सम्मानित्त किया गया। उसके बाद उन्होंने 2 सालों तक बेलगाम में कमांडो को प्रशिक्षण दिया। फिर उनकी पोस्टिंग कश्मीर में कर दी गई।
21 मार्च 2009 के दिन जम्मू – कश्मीर के कुपवाड़ा ज़िले में हफरूदा के जंगलों में हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकवादियों के होने की ख़बर मिली तब मोहित शर्मा अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे, जहाँ अचानक आतंकियों ने हमला कर दिया उस हमले में मेजर ने अपने 2 साथियों को बचा लिया। मगर किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया वो बन्दुक की एक साथ कई गोलियों का शिकार बन गए ये गोलियां बनी उनकी शहादत की वजह।
उन्होंने ना सिर्फ अपने साथियों की जान बचाई और ना सिर्फ शहीद हुए, उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए 25 आतंकियों से लोहा लिया और उनमे से 4 को मौत के घाट भी उतारा इस घटना में उनके साथ 8 और साथी भी शहीद हो गए थे।
मेजर राशिमा शर्मा मेजर मोहित की पत्नी

मेजर राशिमा शर्मा जो खुद भी भारतीय सेना में मेजर के पद पर हैं उन्होंने मरणोपरान्त अशोक चक्र प्राप्त किया जो की उनके पति मेजर मोहित शर्मा के शहादत के लिए 15 अगस्त 2009 के दिन उन्हें दिया गया था। उनको ये पुरस्कार तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने दिया था।
मेजर मोहित शर्मा “इफ्तिखार “

मेजर मोहित शर्मा एक खुफिया मिशन के तहत सन 2004 में खतरनाक आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिद्दीन में शामिल हो गए थे। ताकि उनकी तमाम गतिविधियों पर वो नज़र रख सकें, उनके भविष्य की योजनाओं का पता लगाया जा सके इस संगठन में शामिल होने के लिए उन्होंने सबसे पहले अपना नाम बदाल कर इफ्तिखार बट्ट रख लिया। साथ ही उन्होंने अपनी दाढ़ी भी बढ़ा ली ताकि वो आम स्थानीय लोगों की तरह नज़र आएं।
जब उनकी मुलाक़ात हिज्बुल के आतंकियों से हुई तो उन्होंने उनका विश्वास जितने के लिए उनसे कहा की, एक घटना में उनके भाई की भारतीय सेना ने हत्या कर दी थी जिसका बदला वो लेना चाहते हैं। इस कारण वो हिज्बुल में शामिल होना चाहते हैं, उनको मोहित पर भरोसा हो गया वो उनके साथ कई दिनों तक रहे। उसके बाद एक दिन उन्होंने दो आतंकियों को मौत के घाट उतर दिया इस बहादुरी के लिए उनकी खूब प्रशंशा हुई।
बॉलीवुड भी उनकी इस बहादुरी से बहुत प्रेरित होकर, उनके जीवन पर आधारित (BIOPIC) एक फिल्म बनाने की तैयारी चल रही है, जिसका निर्देशन मनीष मुंद्रा कर रहे हैं। जल्द ही मेजर मोहित शर्मा की जीवनी हम बड़े परदे पर देखेंगे उस फिल्म का नाम मनीष मुंद्रा ने ” इफ़्तिख़ार” रखा है।
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उम्मीद है आप में देशभक्ति की भावना जगाने में मेरे शब्द कामयाब हुए होंगे !
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